श्री सद्‌गुरु नारायण स्वामी दरबार
ॐ नमो नारायणाय
A Sacred Journey to Enlightenment
५००+ वर्ष प्राचीन उद्गम एवं सिद्ध संत परंपरा

परिचय

श्री सिद्ध नारायण टेकड़ी — ५०० वर्ष प्राचीन जागृत संजीवन समाधि, माता महालक्ष्मी का वरदान एवं खांडवप्रस्थ से इंद्रप्रस्थ बनने की अलौकिक गाथा।

उद्गम गाथा

श्री सिद्ध नारायण टेकड़ी का पावन प्राकट्य

भगवान सूर्यनारायण के परम उपासक, राजस्व अधिकारी नारायण करपात्रिकर जी से समर्थ सद्‌गुरु नारायण स्वामी बनने का दिव्य वृत्तांत।

"The Darbar (Abode) of Shree Sadgurunath is open for all" — ५०० वर्ष से अधिक प्राचीन यह संजीवनी समाधि आलंदी, पुणे में संत ज्ञानेश्वर महाराज की समाधि के समान ही परम जागृत एवं चैतन्य है।

प्राचीन काल में रामटेक नगर में नारायण करपात्रिकर नामक एक धर्मनिष्ठ एवं सज्जन राजस्व अधिकारी निवास करते थे। सांसारिक वैभव एवं बंधनों से विरक्त होकर उन्होंने रामटेक के अंबाला सरोवर के निकट घने अरण्य में स्थित इस एकांत टेकड़ी पर आकर कठोर तपस्या प्रारंभ की। नारायण जी भगवान सूर्यनारायण के परम उपासक थे। उन्होंने यहाँ सूर्य गायत्री महामंत्र के २४ पुरश्चरण संपन्न किए तथा भगवती महालक्ष्मी को प्रसन्न करने हेतु घोर तपस्या की। इसके उपरांत उन्होंने पूर्ण संन्यास ग्रहण किया।

जब उनकी तपस्या पराकाष्ठा पर पहुंची, तब माता महालक्ष्मी ने साक्षात् प्रकट होकर उन्हें दिव्य दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। नारायण जी ने विनीत भाव से करबद्ध होकर निवेदन किया: "हे माता! आपकी कृपा से मेरी समस्त सांसारिक व पारलौकिक मनोकामनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, अब मेरे मन में कोई इच्छा शेष नहीं है।" तब भगवती महालक्ष्मी ने स्नेहपूर्वक कहा: "नारायण, मेरा प्रत्यक्ष दर्शन कभी निष्फल नहीं जाता, तुम्हें कोई न कोई वरदान अवश्य मांगना होगा।"

इस पर स्वामी जी ने लोककल्याण हेतु प्रार्थना की: "हे जगन्माता! यदि आप प्रसन्न हैं, तो आप इस पावन टेकड़ी पर सदा-सदा के लिए निवास करें, ताकि यहाँ आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु पर आपकी कृपा सदा बरसती रहे।" देवी महालक्ष्मी ने 'तथास्तु' कहा और तभी से माँ महालक्ष्मी नित्य वास करती हैं।

सुने महल को यार तूने साज से सजवा दिया ।
पुंगी सरीसे बास को हर तान से बजवा दिया ॥
खट्टी सरीके भूमि को ज्योति स्वरूप बनवा दिया ॥

तपस्या के अलौकिक प्रभाव से वे 'श्री समर्थ सद्‌गुरु नारायण स्वामी' कहलाए। अपने समस्त सांसारिक कार्य पूर्ण कर उन्होंने इसी टेकड़ी पर संजीवन समाधि ग्रहण की। यह सद्‌गुरु नारायण स्वामी जी का प्रथम अवतार था। द्वितीय अवतार में वे वरखेड़ (महाराष्ट्र) में समर्थ सद्‌गुरु परमहंस आडकुजी महाराज के रूप में प्रकट हुए।

भगवान तुकडोजीबाबा का आगमन

समाधि में अखंड ज्योति एवं शेषस्वरूप दर्शन

"समाधि के भीतर अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती है और सद्‌गुरु नारायण स्वामी शेषनाग स्वरूप में विराजमान हैं।"
भगवान तुकडोजीबाबा
सिद्ध परंपरा एवं महापुरुष

संत परंपरा

इस तपोभूमि पर अखंड तपस्या करने वाले एवं जन-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाले महापुरुष।

श्री सद्‌गुरु नारायण स्वामी

श्री सद्‌गुरु नारायण स्वामी

आदो नित्यरूपा सदा स्मरणियां वृति स्थिर राहें मनी न ढले चित्त कदा तया वरुणिया निश्चित राहें जनि
"पूरी लगन होतो देते दरस चाहे बीतें होंगे 500 बरस टेकड़ी पे बैठे है नारायण स्वामी"
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परमहंस श्री समर्थ सद्गुरु आडकुजी बाबा

परमहंस श्री समर्थ सद्गुरु आडकुजी बाबा

"सच्चा ये गुरु घर है रक्षा हमारी करें नारायण स्वामी"
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श्री दत्तगुरु बालयोगी छोटूबाबा

श्री दत्तगुरु बालयोगी छोटूबाबा

॥ अनंतकोटि ब्रह्मांडनायक राजाधिराज योगीराज श्री समर्थ सद्गुरु दत्तगुरु बालयोगी छोटूबाबा की जय ॥
"श्री दिगंबरा दिगंबरा छोटू बाबा दिगंबरा"
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श्री हनुमान जी महाराज
श्री हनुमान जी

श्री हनुमान जी दर्शन

श्री हनुमान जी महाराज, जिन्हें बालयोगी जी बाल्यकाल में 'बड़े भैया' कहकर पुकारते थे। यह वही परम पावन स्थल है जहाँ प्रभु श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ जी का पिंडदान किया था।

"तुम्हरे भजन जो राम को पावे । जनम जनम के दुःख बिसरावे"
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॥ श्री जय महालक्ष्मी प्रसन्न ॥
॥ श्री जय महालक्ष्मी प्रसन्न ॥

॥ श्री जय महालक्ष्मी प्रसन्न ॥

सिद्ध नारायण टेकड़ी पर श्री महालक्ष्मी जी प्रत्यक्ष रूप में विराजमान हैं। भगवान सूर्यनारायण के परम उपासक समर्थ सद्‌गुरु नारायण स्वामी जी की घोर तपस्या एवं २४ पुरश्चरणों से प्रसन्न होकर भगवती महालक्ष्मी ने यहाँ नित्य वास का पावन वरदान दिया था।

"श्रीमहालक्ष्मी सदा प्रसन्न । चालतसे यज्ञ यागादि, अन्नदान ॥"
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॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री गणेशाय नमः ॥

॥ श्री गणेशाय नमः ॥

सिद्ध नारायण टेकड़ी पर श्री महालक्ष्मी जी के साथ बुद्धि, समृद्धि और रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान श्री गणेश जी प्रत्यक्ष रूप में विराजमान हैं। भक्तों के कष्टों को हरने और सभी शुभ कार्यों को निर्विघ्न संपन्न करने के लिए भगवती महालक्ष्मी के साथ विघ्नहर्ता गणेश जी यहाँ नित्य निवास करते हैं।

"वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥"
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रामकुंड वाले हनुमान जी
रामकुंड वाले हनुमान जी

रामकुंड वाले हनुमान जी

श्री हनुमान जी महाराज, जिन्हें बालयोगी जी बाल्यकाल में 'बड़े भैया' कहकर पुकारते थे। यह वही परम पावन स्थल है जहाँ प्रभु श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ जी का पिंडदान किया था।

"तुम्हरे भजन जो राम को पावे । जनम जनम के दुःख बिसरावे"
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गुरुमहाराज ताई महाराज को बता रहे

टेकड़ी के ताई महाराज

ताई मैं दत्त हुं — मेरा दर्शन बड़ा ही दुर्लभ है बेटा
"ताई, यहाँ बाजार नहीं भराना क्योंकि,
यह तपस्वियों की सिद्ध महा पुरुषों की जागृत भूमि है। बेटा

ताई मैं दत्त हुं"
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पावन दर्शन

श्री सद्‌गुरु नारायण स्वामी दरबार
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